कहते है 'चेहरा' कुछ और नहीं बल्कि एक 'पहचान' है ,
जैसे गीतकार की पहचान उसका गीत है ,
जैसे कवी की पहचान उसका काव्य है ,
नदी की पहचान उसका बहाव है,
मेरा भी एक चेहरा है ,मेरी भी एक पहचान है l
मेरा चेहरा कुछ और नहीं ,
पल - प्रतिपल तुम्हारा ही स्मरण है ,
तुम्हारे ही नाम का नित्य सुमिरण है ,
केवल तुम्हारे ही अस्तित्व का प्रतिबिंब है l
- अजेय ll
जैसे गीतकार की पहचान उसका गीत है ,
जैसे कवी की पहचान उसका काव्य है ,
नदी की पहचान उसका बहाव है,
मेरा भी एक चेहरा है ,मेरी भी एक पहचान है l
मेरा चेहरा कुछ और नहीं ,
पल - प्रतिपल तुम्हारा ही स्मरण है ,
तुम्हारे ही नाम का नित्य सुमिरण है ,
केवल तुम्हारे ही अस्तित्व का प्रतिबिंब है l
- अजेय ll

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